मुख्य प्रमाण आ संख्या
| दावा | साक्ष्य-आधारित अर्थ |
|---|---|
| मनक भीतरक बोली सभकेँ बोलि कऽ पढ़बाक गति तक सीमित करैत अछि | मौन आ सस्वर पढ़बाक गति अलग-अलग होइत अछि; दुनू बराबर होइछ, ई सरल दावा समर्थित नहि अछि |
| मनक भीतरक बोली हटा देला सँ तेजी सँ बुझब निश्चित होइत अछि | एहन कोनो सामान्य गारंटी स्थापित नहि अछि |
| फेर सँ पाछाँ पढ़नाइ सदिखन समयक बर्बादी अछि | प्रयोगात्मक साक्ष्य देखबैत अछि जे फेर पढ़नाइ बुझबाक क्षमता बढ़ा सकैत अछि |
| देखाओल गेल बेसी WPM सदिखन नीक पढ़ाइ होइत अछि | बुझबाक क्षमता सेहो जाँचबाक चाही |
‘मनहि-मन उच्चारण’ शब्दक उपयोग ढीला अर्थमे होइत अछि। ई मनमे सुनाइ पड़ए बला आवाज, बोलबासँ जुड़ल सूक्ष्म गतिविधि, वा ध्वनि-प्रतिनिधित्व उपयोग करए बला भाषा-प्रसंस्करणकेँ बुझा सकैत अछि। ई एक-दोसराक बदला माप नहि थिक। तेजी सँ पढ़बाक समीक्षामे ध्वन्यात्मक प्रक्रियाक चर्चा अछि, आ ई मानबाक विरुद्ध तर्क दैत अछि जे सुनाइ पड़ए बला मनक आवाज टारि देला सँ पढ़बाक भाषा-प्रसंस्करणक जरूरत समाप्त भऽ जाइत अछि। Rayner et al., 2016
आँखिक गति बेसी तेज होयब किएक पर्याप्त नहि
आँखि स्थिर दृष्टि आ तीव्र नजरि-चालि द्वारा दृश्य जानकारी जमा करैत अछि, मुदा बुझबाक लेल शब्द पहचानब आ ओकर अर्थ जोड़ब जरूरी अछि। आँखिक गति संबंधी समीक्षा देखबैत अछि जे दृश्य जानकारी लेबाक तरीका आ भाषा-प्रसंस्करण एक-दोसरासँ जुड़ल अछि। सूचककेँ तेजी सँ चलायब वा आँखिकेँ पाछाँ लौटबासँ रोकब ई साबित नहि करैत अछि जे ओहि जानकारीकेँ ओतबे बुझल गेल। Rayner, 1998 CLIFTON et al., 2015
Schotter आ हुनकर सहकर्मी सभ एहन बदलावक परीक्षण कयलनि जाहिमे पहिले पढ़ल शब्द उपयोगी ढंग सँ फेर पढ़बाक लेल उपलब्ध नहि रहैत छल। एहिसँ बुझबाक क्षमता घटल। ई निष्कर्ष ई साबित नहि करैत अछि जे प्रत्येक बेर पाछाँ लौटब जरूरी अछि; मुदा ई जरूर देखबैत अछि जे प्रत्येक पाछाँक चालिकेँ दोष मानि स्वतः हटेबाक चाही, एहन सोच गलत अछि। Schotter et al., 2014
किछु अंश बेसी तेज किएक बुझाइत अछि
शब्दसँ परिचय आ भाषा-अनुभव प्रसंस्करणक जरूरत बदलैत अछि। दोसर भाषा मे शब्द-आवृत्ति पर शोध आ शब्द-भंडार संबंधी अध्ययन देखबैत अछि जे अपरिचित शब्द वा कम अभ्यास कएल भाषा पढ़बाक गति धीमा कऽ सकैत अछि। एहिसँ ई साबित नहि होइत अछि जे मनक भीतरक बोली एकर कारण अछि, भले कठिन अंश पढ़ैत पाठककेँ मनक आवाज बेसी महसूस हो। Whitford et al., 2012 Brysbaert et al., 2016
एकरा पर की असर करैत अछि?
सरसरी पढ़बाक बारेमे की?
कोनो विषय खोजबाक वा मोटामोटी जानकारी लेबाक उद्देश्य हो तँ सरसरी पढ़ब उपयोगी भऽ सकैत अछि। एहि तरीका मे कम जानकारी लेल जाइत अछि, आ एकर मूल्यांकन ओहि उद्देश्यक हिसाबसँ होबाक चाही। तेजी सँ पढ़बाक समीक्षा एहन गतिविधिकेँ असामान्य रूपसँ बेसी गति पर पूरा पाठ बुझबाक गतिविधिसँ अलग मानैत अछि। सरसरी पढ़ाइ तेज होयब ई प्रमाण नहि जे विस्तृत बुझाइ ज्योंकात्यों रहल। Rayner et al., 2016
वयस्कक संख्यात्मक औसतक सेहो सीमा अछि। ई अंग्रेजीमे कएल गेल कार्यक सारांश थिक, जाहिमे बहुत रास शिक्षित सहभागी छलाह; ई सभ भाषाक लेल उम्र-अनुसार मानक नहि थिक। बच्चा, वृद्ध वयस्क आ दोसर भाषा पढ़निहारकेँ एकटा औसत सँ वा हुनकर मनक आवाज कतेक शान्त लगैत अछि, ताहि आधार पर नहि आँकबाक चाही। Brysbaert, 2019
दबाबि देबाक तरकीबक बदला की समर्थित अछि?
उद्देश्यक अनुकूल सामग्री पढ़ू, बुझाइ जाँचू आ भाषा तथा विषयसँ परिचय बढ़ाउ। पढ़ाइ संबंधी समीक्षा अनुभव आ भाषा-दक्षताकेँ प्रासंगिक कारक मानैत अछि, मुदा अभ्यासक कोनो सब लेल एकसमान मात्रा वा गति बढ़बाक गारंटी स्थापित नहि करैत अछि। शब्द-भंडारक पहुँच पर शोध सेहो ई देखैत अछि जे खास पाठक कतेक हिस्सा पाठक परिचित अछि, कोनो तुरन्त गति बढ़ेबाक उपाय नहि। Rayner et al., 2016 Nation, 2006
अपन तुलना लेल अपरिचित अंश लिअ आ समयक संग बुझाइक तुलना करू। जँ कोनो तरीका WPM बढ़बैत अछि मुदा पाठक व्याख्या करबाक क्षमता घटबैत अछि, तँ एकरा लेन-देन कहू। केवल मनक भीतरक आवाज कम महसूस होयब, पढ़ाइ सुधरबाक प्रमाण नहि अछि। Rayner et al., 2016 Schotter et al., 2014
व्यावहारिक लक्ष्य उपयुक्त सामग्रीकेँ बेसी कुशलतासँ बुझब अछि। उद्धृत कोनो स्रोत ई नहि देखबैत अछि जे ब्राउजर परीक्षणक दौरान मनहि-मन उच्चारण दबेबासँ सामान्य बुद्धिमत्तामे वृद्धि होइत अछि वा पढ़बाक भाषा-प्रसंस्करण सीमा स्थायी रूपसँ हटि जाइत अछि। Rayner et al., 2016 CLIFTON et al., 2015
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पढ़बाक गति परीक्षण
पढ़बाक गति परीक्षण करैत काल अपरिचित दबाबबाक तकनीक जबरदस्ती अपनौने बिना प्रयास करू। गति संग बुझाइ सेहो दर्ज करू। पढ़बाक तरीका पर प्रयोग करैत छी तँ परिणामकेँ खास अंशक तुलना मानू, मनक भीतरक बोलीक प्रमाणित माप नहि।
आम सवाल
की मनक भीतरक आवाज खराब पढ़ाइक निशानी अछि?
समीक्षा एहन सामान्य निष्कर्षक समर्थन नहि करैत अछि। ध्वनिसँ जुड़ल भाषा-प्रसंस्करण आ प्रत्येक शब्द जोर सँ बोलब अलग-अलग बात अछि। Rayner et al., 2016
की पाछाँ ताकब छोड़ि देबाक चाही?
सार्वभौमिक नियमक रूपमे नहि। नियंत्रित प्रयोगमे देखल गेल जे फेर पढ़बाक सुविधा बुझाइमे मदद करैत अछि। Schotter et al., 2014
की हम अलगसँ सरसरी पढ़बाक अभ्यास कऽ सकैत छी?
हँ, मुदा एकर मूल्यांकन मोटामोटी जानकारी वा खोजबाक उद्देश्य लेल चुनल अंश पढ़बाक रूपमे करू; देखाओल गति पर प्रत्येक बात बुझि लेबाक प्रमाण मानि नहि। Rayner et al., 2016
स्रोत
- Brysbaert (2019)। हम प्रति मिनट कतेक शब्द पढ़ैत छी? पढ़बाक गति पर समीक्षा आ मेटा-विश्लेषण।
- Rayner et al. (2016)। पढ़बाक लेल एतेक बेसी, समय एतेक कम।
- Rayner (1998)। पढ़ाइ आ सूचना-प्रसंस्करणमे आँखिक गति: 20 वर्षक शोध।
- CLIFTON et al. (2015)। पढ़ाइ आ सूचना-प्रसंस्करणमे आँखिक गति: Keith Rayner केर 40 वर्षक विरासत।
- Whitford et al. (2012)। दोसर भाषा-अनुभव पहिल आ दोसर भाषाक शब्द-आवृत्ति प्रभावकेँ बदलैत अछि: स्वाभाविक अनुच्छेद-पढ़ाइमे आँखिक गतिसँ साक्ष्य।
- Nation (2006)। पढ़बाक आ सुनबाक लेल कतेक पैघ शब्द-भंडार चाही?।
- Schotter et al. (2014)। जे पढ़लहुँ (मात्र एक बेर), ताहि पर भरोसा नहि करू।
- Brysbaert et al. (2016)। हम कतेक शब्द जनैत छी? शब्दक परिभाषा, भाषायी संपर्कक मात्रा आ सहभागीकेँ उम्रक आधार पर शब्द-भंडारक व्यावहारिक अनुमान।
